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दृष्टि आई इंस्टीट्यूट द्वारा ग्लूकोमा जागरूकता वॉकाथॉन का आयोजन

दृष्टि आई इंस्टीट्यूट द्वारा ग्लूकोमा जागरूकता वॉकाथॉन का आयोजन

देहरादून। दृष्टि आई इंस्टीट्यूट, देहरादून द्वारा ग्लूकोमा (काला मोतिया) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक ग्लूकोमा अवेयरनेस वॉकाथॉन का आयोजन किया गया। ग्लूकोमा अंधत्व के प्रमुख कारणों में से एक है। इस कार्यक्रम को मुख्य अतिथि सविन बंसल, जिलाधिकारी (DM), देहरादून, उत्तराखंड द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। उन्होंने इस अवसर पर समय रहते जांच और जनजागरूकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ग्लूकोमा को “नज़र चुराने वाला मौन रोग” बताया।

दृष्टि आई इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. गौरव लूथरा ने बताया कि
“ग्लूकोमा को अक्सर ‘साइलेंट डिज़ीज़’ कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते जब तक दृष्टि को काफी नुकसान नहीं पहुंच जाता।”
इस वॉकाथॉन का उद्देश्य केवल सामुदायिक भागीदारी तक सीमित नहीं था, बल्कि लोगों को ग्लूकोमा के जोखिम, लक्षणों और उपचार के बारे में जागरूक करना भी था। यह पहल ग्लूकोमा अवेयरनेस वीक (8–14 मार्च 2026) के दौरान दृष्टि फाउंडेशन के प्रयासों का हिस्सा है।

दृष्टि आई इंस्टीट्यूट में रेटिना सेवाओं के प्रमुख डॉ. सौरभ लूथरा ने कहा कि
“समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर दृष्टि हानि को रोका जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।”

इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में डॉ. रीटा धवन (अध्यक्ष, देहरादून ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी – GODS), विकास देवान (अध्यक्ष, SJA एलुमनी एसोसिएशन) और हेमंत कोचर (अध्यक्ष, रोटरी क्लब) उपस्थित रहे।

इस आयोजन में कई स्थानीय संगठनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और समुदाय के मजबूत सहयोग का प्रदर्शन किया। सहयोगी संगठनों में रोटरी ई-क्लब दून 3080 के प्रतिनिधि मोहित गोयल, SJA एलुमनी एसोसिएशन के प्रतिनिधि परवीन चंदोक और अंबुज ओबेरॉय, तथा आर्ट ऑफ लिविंग के प्रतिनिधि नितिन जैन शामिल थे। इसके अलावा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ. राधिका रतूड़ी, डॉ. अरुंदीप और डॉ. महेश अग्रवाल, तथा देहरादून ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी (GODS) की सदस्य डॉ. महेश्वरी भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

प्रतिभागियों ने जागरूकता टी-शर्ट पहनकर और बैनर लेकर देहरादून की सड़कों पर मार्च किया। इन बैनरों के माध्यम से नियमित नेत्र जांच के महत्व पर जोर दिया गया, विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास है, या जिन्हें मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), आंख की चोट, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और थायरॉइड जैसी समस्याएं हैं।

डॉ. सविता लूथरा के नेतृत्व में दृष्टि आई इंस्टीट्यूट अपनी व्यापक नेत्र देखभाल सेवाओं के लिए जाना जाता है। संस्थान की विशेषज्ञ टीम में डॉ. शिवम गुप्ता, डॉ. अमरदीप कौर, डॉ. एस.एस. गुगलानी और डॉ. वैभव भट्ट भी शामिल हैं, जो उन्नत नेत्र चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

इस वॉकाथॉन के सफल आयोजन में मुकेश मिंगवाल और करुणा धामीर ने आयोजन टीम का नेतृत्व किया और दृष्टि टीम तथा स्वयंसेवकों के साथ मिलकर कार्यक्रम का समन्वय किया।

ग्लूकोमा अवेयरनेस वीक (8–14 मार्च 2026) के दौरान दृष्टि आई इंस्टीट्यूट लगातार जागरूकता अभियानों का आयोजन करेगा, ताकि लोगों को ग्लूकोमा और इसके समय पर निदान के महत्व के बारे में जानकारी दी जा सके। इन पहलों के माध्यम से संस्थान लोगों को नियमित नेत्र जांच कराने और अपनी दृष्टि की सुरक्षा के लिए जागरूक करने का प्रयास कर रहा है, जिससे रोके जा सकने वाले अंधत्व को कम किया जा सके।

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