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भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के पहले दिन हंगामा, कांग्रेस-उक्रांद का प्रदर्शन, पुलिस से भिड़े कार्यकर्ता
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सीएम धामी ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
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​शिक्षा के मंदिर में अनैतिक गतिविधियां अक्षम्य, दोषियों पर होगी कठोरतम कार्रवाई: कुसुम कंडवाल

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आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान; स्कूलों के पास मदिरा की दुकानों और संदिग्ध केंद्रों की जांच के निर्देश

​अभिभावकों से अपील: नई पीढ़ी को अपराध की गर्त से बचाने के लिए रखें बच्चों पर कड़ी नजर

​देहरादून-  देहरादून के एक प्रतिष्ठित स्कूल परिसर में अनैतिक देह व्यापार (सेक्स रैकेट) के संचालन का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी देहरादून को पत्र लिखते हुए निर्देशित किया कि यह घटना न केवल निंदनीय है, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस “शिक्षा के मंदिर” को समाज में सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, वहां इस प्रकार की घृणित गतिविधियों का होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आयोग ने सख्त लहजे में कहा है कि शिक्षा के क्षेत्र को कलंकित करने वाले किसी भी दोषी या गिरोह के सदस्यों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध संवैधानिक प्रावधानों के तहत कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

​मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि प्रकरण की निष्पक्ष और हर संभावित पहलू से गहन जांच की जाए, ताकि इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं और इसमें संलिप्त सभी चेहरों को बेनकाब किया जा सके। इसी क्रम में, उन्होंने जनपद के समस्त सरकारी, गैर-सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के आसपास व्यापक चेकिंग अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने मांग की है कि स्कूलों के पास संचालित होने वाली मदिरा की दुकानों, नशे की सामग्री बेचने वाले केंद्रों और ऐसे अन्य संदिग्ध ठिकानों की कड़ाई से जांच हो, जो युवा पीढ़ी को अनैतिकता की ओर आकर्षित करने का माध्यम बनते हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में किसी भी शैक्षणिक संस्थान के परिसर या उसके निकट ऐसी संदिग्ध गतिविधियों के लिए कोई स्थान शेष न रहे।

​अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को रेखांकित किया और अभिभावकों के लिए एक मार्मिक संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और उन्हें सही मार्ग पर रखने के लिए माता-पिता की भूमिका सर्वोपरि है। यह अभिभावकों की एक अनिवार्य जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों की निरंतर मॉनिटरिंग करें, वे किस प्रकार के लोगों के संपर्क में हैं और अपना समय कहां व्यतीत कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी रखें। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन की सख्ती और अभिभावकों की सतर्कता के समन्वय से ही हम अपनी युवा पीढ़ी को सुरक्षित रख पाएंगे और शिक्षा के मंदिरों की गरिमा को पुनः स्थापित कर सकेंगे।

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