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उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में फैल रही दुर्लभ बीमारी, लीवर और फेफड़ों में बन रही जानलेवा गांठें

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देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी सिस्टिक इचिनोकोकोसिस (Cystic Echinococcosis) तेजी से फैल रही है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 25 मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि हो चुकी है। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए अब इस पर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है।

क्या है सिस्टिक इचिनोकोकोसिस?

यह बीमारी इचिनोकोकस ग्रैनुलोसस नामक परजीवी के संक्रमण से होती है, जो आमतौर पर उन क्षेत्रों में फैलता है जहां लोग भेड़, बकरी और कुत्तों को एक साथ पालते हैं। यह परजीवी फलों, सब्जियों और दूषित पानी के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है और फिर लीवर या फेफड़ों में जहरीली गांठ बनाता है।

लक्षणों की देर से होती है पहचान

चिकित्सकों के अनुसार, इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य पेट दर्द, भूख न लगना, उल्टी आदि हो सकते हैं, जो अक्सर अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं। यही कारण है कि समय रहते इसकी पहचान मुश्किल होती है। जब गांठ 10 सेंटीमीटर से अधिक की हो जाती है, तब जाकर लक्षण स्पष्ट रूप से सामने आते हैं।

उत्तरकाशी, चमोली और टिहरी में सबसे अधिक मामले

दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. अभय कुमार के अनुसार, उत्तराखंड के सभी पर्वतीय जिलों से इसके मरीज मिल रहे हैं, लेकिन उत्तरकाशी, चमोली और टिहरी जिलों से सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। डॉ. कुमार की देखरेख में अब इन मरीजों पर एक पूर्वप्रभावी वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, जिसके परिणाम जल्द सामने आने की उम्मीद है।

कश्मीर में भी सामने आए मामले

इसी बीमारी पर लाइफ जर्नल की ओर से कश्मीर के श्रीनगर क्षेत्र में वर्ष 2019 से 2024 तक 110 संदिग्ध मरीजों पर अध्ययन किया गया था। इनमें से 12 मरीजों में सिस्टिक इचिनोकोकोसिस की पुष्टि हुई। इनमें 4 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल थीं, जिनकी औसत उम्र 46 से 58 वर्ष के बीच दर्ज की गई।

जनस्वास्थ्य के लिए चेतावनी का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी है, खासतौर पर उन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लोग पशुपालन करते हैं और स्वच्छता की स्थिति कमजोर होती है। बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए खाद्य पदार्थों की स्वच्छता, पशुओं के नियंत्रण, और समय पर जांच अत्यंत आवश्यक हैं।

क्या करें बचाव के लिए?

  • फलों और सब्जियों को अच्छे से धोकर ही सेवन करें

  • जानवरों को घरों से दूर रखें, विशेषकर कुत्तों का संपर्क सीमित करें

  • दूषित पानी से बचें

  • यदि पेट में गांठ, असामान्य दर्द या लगातार भूख न लगने जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं

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