Flash Story
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव करता रहेगा प्रेरित- सीएम
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव करता रहेगा प्रेरित- सीएम
मुख्यमंत्री धामी ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया स्वागत
मुख्यमंत्री धामी ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया स्वागत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में चमकेगा उत्तराखंड : रेखा आर्या
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में चमकेगा उत्तराखंड : रेखा आर्या
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं
एनडीएमए सदस्य डाॅ. असवाल ने आपदा की तैयारियों को परखा
एनडीएमए सदस्य डाॅ. असवाल ने आपदा की तैयारियों को परखा
आगामी नेशनल गेम्स में पदकों की संख्या बढ़ाने पर करें फोकस : रेखा आर्या
आगामी नेशनल गेम्स में पदकों की संख्या बढ़ाने पर करें फोकस : रेखा आर्या
मुख्यमंत्री धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का किया स्थलीय निरीक्षण
मुख्यमंत्री धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का किया स्थलीय निरीक्षण
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उपनल कर्मचारी के परिजनों को सौंपा ₹50 लाख की बीमा राशि का चैक
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उपनल कर्मचारी के परिजनों को सौंपा ₹50 लाख की बीमा राशि का चैक
टिहरी में दर्दनाक सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर सरिये से लदे ट्रक से टकराई कार, एक महिला की मौत
टिहरी में दर्दनाक सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर सरिये से लदे ट्रक से टकराई कार, एक महिला की मौत

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर ईको सेंसिटिव जोन के बावजूद अंधाधुंध निर्माण, आपदा का बढ़ रहा खतरा

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर ईको सेंसिटिव जोन के बावजूद अंधाधुंध निर्माण, आपदा का बढ़ रहा खतरा

उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के अहम मार्ग उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से गंगोत्री धाम तक का 100 किलोमीटर क्षेत्र वर्ष 2013 में ईको सेंसिटिव जोन (Eco Sensitive Zone) घोषित किया गया था। नियम के अनुसार, भागीरथी नदी और उसकी सहायक नदियों के दोनों ओर 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण वर्जित है। लेकिन हकीकत यह है कि इस पूरे क्षेत्र में लगातार अंधाधुंध निर्माण हो रहे हैं।

मानसून में बढ़ता खतरा

मानसून सीजन में नदियों का जलस्तर बढ़ते ही इन अवैध निर्माणों पर आपदा का खतरा मंडराने लगता है। बावजूद इसके, प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नदियों के किनारे बने होटल, रिजॉर्ट और आश्रम हर साल आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के दौरान सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं।

स्थानीय विरोध और न्यायालय की सख्ती

जब 2013 में इस क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था, उस समय स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था। लेकिन इसके बावजूद इसे लागू कर दिया गया। इसके बाद भी नदियों के किनारे नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी रहा।

धराली और हर्षिल क्षेत्र में आई आपदाओं के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग से इस मामले पर जवाब मांगा था। अदालत ने साफ कहा था कि ईको सेंसिटिव जोन के नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

नियमों की अनदेखी

नियमों के मुताबिक भागीरथी नदी से 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं होना चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि हर्षिल से लेकर उत्तरकाशी मुख्यालय तक कई स्थानों पर 50 मीटर से भी कम दूरी पर निर्माण कार्य देखे जा सकते हैं। इससे न केवल पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि उत्तरकाशी जैसे भूकंप व आपदा संवेदनशील जिले में जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में हो रहे अनियंत्रित निर्माणों से न केवल नदियों के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ रहा है, बल्कि यह भविष्य में बड़े पैमाने पर आपदाओं का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को तुरंत ऐसे निर्माणों पर रोक लगानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top