Flash Story
16 जुलाई के बाद बदलेगा उत्तराखंड का मौसम, 20 जुलाई तक बारिश के आसार
16 जुलाई के बाद बदलेगा उत्तराखंड का मौसम, 20 जुलाई तक बारिश के आसार
शहनाज गिल और जय रंधावा की ‘इश्कनामा’ का ट्रेलर हुआ रिलीज
शहनाज गिल और जय रंधावा की ‘इश्कनामा’ का ट्रेलर हुआ रिलीज
पीएम आवास योजना के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं- डॉ. आर. राजेश कुमार
पीएम आवास योजना के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं- डॉ. आर. राजेश कुमार
अस्पताल में भर्ती होने पर भी पीआरडी जवानों को मिलेगा मानदेय- रेखा आर्या
अस्पताल में भर्ती होने पर भी पीआरडी जवानों को मिलेगा मानदेय- रेखा आर्या
एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा प्रहार, विधौली और रानीपोखरी में पांच निर्माण सील
एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर बड़ा प्रहार, विधौली और रानीपोखरी में पांच निर्माण सील
बारिश में बढ़ जाता है स्टमक फ्लू का खतरा! जानिए कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय
बारिश में बढ़ जाता है स्टमक फ्लू का खतरा! जानिए कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय
नैनीताल में मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित, 11 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावे-आपत्तियां
नैनीताल में मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित, 11 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावे-आपत्तियां
जनहित सर्वोपरि, विकास कार्यों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी : सांसद अजय भट्ट
जनहित सर्वोपरि, विकास कार्यों में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी : सांसद अजय भट्ट
बीकेटीसी अध्यक्ष का बहस की चुनौती देकर भागना बताता है कि भाजपा के पास जवाब नहीं — गणेश गोदियाल
बीकेटीसी अध्यक्ष का बहस की चुनौती देकर भागना बताता है कि भाजपा के पास जवाब नहीं — गणेश गोदियाल

भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड के चार जिलों में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए उत्तराखंड के चार जिलों में लगेगा अर्ली वार्निंग सिस्टम

जीएसआई ने शुरू किया परीक्षण, समय रहते मिलेगी चेतावनी

देहरादून। उत्तराखंड में भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) जल्द ही चार जिलों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में इस सिस्टम का परीक्षण चल रहा है और सफलता मिलने के बाद इसे उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिलों में स्थापित किया जाएगा। इससे समय रहते चेतावनी जारी की जा सकेगी और जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

जीएसआई देहरादून के निदेशक रवि नेगी ने बताया कि यह तकनीक भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाएगी। वहीं, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि अर्ली वार्निंग सिस्टम से न केवल पूर्वानुमान और सुरक्षा उपाय मजबूत होंगे, बल्कि स्थानीय लोगों को भी समय रहते सतर्क किया जा सकेगा।

सचिव सुमन ने भूस्खलन आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर आयोजित कार्यशाला में कहा कि शोध संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययनों को सरल भाषा में साझा किया जाना चाहिए ताकि विभाग आम जनता को जागरूक कर सके। उन्होंने जोर दिया कि पूर्वानुमान जारी करने के बाद इतना समय जरूर मिलना चाहिए कि लोग सुरक्षा के कदम उठा सकें।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि राज्य में अधिकांश भूस्खलन बारिश के दौरान होते हैं और चमोली जिला सबसे अधिक प्रभावित है। आईआईआरएस के वैज्ञानिक डॉ. सोवन लाल ने कहा कि उपग्रह और ड्रोन तकनीक से संवेदनशील इलाकों की निगरानी और अध्ययन किया जा सकता है।

जीएसआई उप महानिदेशक संजीव कुमार और डॉ. हरीश बहुगुणा ने बताया कि रियल-टाइम डेटा मिलने पर अर्ली वार्निंग सिस्टम के नतीजे और बेहतर होते हैं। साथ ही, राज्य में कितने ऑल वेदर स्टेशन की जरूरत है, इस पर भी चर्चा की गई।

कार्यशाला में जीएसआई और आपदा प्रबंधन विभाग के बीच एक एमओयू भी साइन हुआ, जिससे शोध और सूचनाओं का आदान-प्रदान और अधिक सहज हो सकेगा। इस अवसर पर वाडिया संस्थान, सीबीआरआई सहित 28 संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top