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मुख्यमंत्री स्तर पर मासिक एवं मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक 10 दिन में होगी समीक्षा

मुख्यमंत्री ने 6940 करोड़ की 12 प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा की 

50 प्रतिशत से अधिक प्रगति वाली परियोजनाओं को 15 अक्टूबर 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश

मुख्यमंत्री स्तर पर मासिक एवं मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक 10 दिन में होगी समीक्षा

भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति और भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर दिया जोर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रगति पोर्टल के माध्यम से राज्य की विभिन्न महत्वपूर्ण अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक में परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन तथा अन्य विभागों की 6940 करोड़ की कुल 12 प्रमुख परियोजनाओं की विस्तार से जानकारी ली गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में सभी का योगदान जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि इन परियोजनाओं के कार्यों में और तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री स्तर पर प्रत्येक माह, मुख्य सचिव स्तर पर 10 दिनों में इसकी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जायेगी और नियमानुसार सख्त कारवाई भी की जायेगी। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं पर 50 प्रतिशत तक कार्य हो चुका है, 15 अक्टूबर 2026 तक उन कार्यों को पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, क्षतिपूर्ति भुगतान अथवा अन्य प्रशासनिक कारणों से विलम्ब हो रहा है, उनके समाधान के लिए संबंधित विभाग समन्वित रूप से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रगति पोर्टल को प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उपयोग करते हुए प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा की जाए तथा लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में अनावश्यक विलम्ब से न केवल विकास कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि जनहित एवं आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बैठक में रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला, बनबसा एवं रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र परियोजनाओं, चारधाम सड़क परियोजनाओं, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क परियोजना, हरिद्वार एवं काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने वन भूमि हस्तांतरण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों, भूमि अधिग्रहण तथा क्षतिपूर्ति वितरण से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिये कि जनपद स्तर पर लंबित प्रकरणों की व्यक्तिगत निगरानी कर उनका त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा, सीमांत क्षेत्रों की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं, विद्युत अवसंरचना तथा परिवहन सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं राज्य के समग्र विकास और जनता की सुविधाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन से पर्यटन, व्यापार, निवेश एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित स्तर से कम है, उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र परिणाम सुनिश्चित किए जाएं।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव बृजेश कुमार संत, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, बंशीधर तिवारी, संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

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