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बार-बार थकना और ज्यादा प्यास लगना! बच्चों में दिखें ये बदलाव तो हो जाएं सावधान

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बच्चों की सेहत को लेकर छोटी-सी लापरवाही भी कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। खास बात यह है कि कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के शुरुआती संकेत बेहद सामान्य नजर आते हैं। बच्चा बार-बार थक रहा हो, खेलते समय जल्दी हांफने लगे, लगातार पानी मांगता हो या उसकी नींद और व्यवहार में बदलाव दिखाई दे रहा हो, तो माता-पिता को इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।

बच्चे अपनी परेशानी को हमेशा सही तरीके से बता नहीं पाते। ऐसे में उनके रोजमर्रा के व्यवहार और शारीरिक बदलावों पर नजर रखना जरूरी हो जाता है। हर बार इन लक्षणों का मतलब किसी गंभीर बीमारी से नहीं होता, लेकिन अगर ये समस्याएं लगातार बनी रहें या पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ जाएं, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

लगातार थकान को सिर्फ आलस न समझें

अगर बच्चा पहले की तरह खेल-कूद नहीं कर पा रहा है, थोड़ी गतिविधि के बाद ही थक जाता है या पढ़ाई के दौरान उसका ध्यान बार-बार भटकता है, तो इसकी वजह सिर्फ आलस नहीं हो सकती। आयरन की कमी और एनीमिया में बच्चों को कमजोरी, थकान, चक्कर या सांस फूलने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

बच्चों के तेजी से बढ़ने के दौर में शरीर को आयरन की जरूरत भी बढ़ जाती है। लंबे समय तक इसकी कमी रहने पर बच्चे के शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है।

बहुत ज्यादा प्यास और बार-बार पेशाब आए तो दें ध्यान

बच्चे का गर्मी या ज्यादा खेल-कूद के कारण पानी अधिक पीना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के उसे लगातार बहुत ज्यादा प्यास लग रही है और पेशाब भी सामान्य से अधिक आ रहा है, तो इस संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसे लक्षण डायबिटीज में भी दिखाई दे सकते हैं। बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के साथ टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी हो सकता है। अधिक वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी और परिवार में डायबिटीज का इतिहास कुछ बच्चों में जोखिम बढ़ा सकता है।

नींद और व्यवहार में बदलाव भी हो सकता है संकेत

अगर बच्चा अचानक ज्यादा चिड़चिड़ा रहने लगा है, दिनभर सुस्ती महसूस करता है, ठीक से सो नहीं रहा या पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों में उसकी रुचि कम हो गई है, तो माता-पिता को इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

नींद बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लगातार कम नींद लेने से वजन बढ़ने समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा बच्चे का खान-पान, रोजाना की शारीरिक गतिविधि और स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय भी उसकी सेहत को प्रभावित करता है।

बढ़ता वजन भी हो सकता है चिंता का विषय

बच्चे का वजन बढ़ना केवल उसकी शारीरिक बनावट से जुड़ा मामला नहीं है। बचपन में मोटापे की समस्या आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है।

इसलिए बच्चों के वजन, खान-पान और रोजाना की गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि बच्चों के स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर बच्चे में थकान, कमजोरी, अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब, सांस फूलना, नींद में बदलाव या व्यवहार में असामान्य परिवर्तन जैसे लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो खुद से किसी बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।

(साभार)

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