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‘द लिटरेचर लॅरिट सम्मान’ से सम्मानित हुए ‘निशंक’

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देहरादून/नई दिल्ली। अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति एवं वैश्विक हिन्दीशाला संस्थान (वीएचएसएस जर्मनी) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ० रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को नई दिल्ली में “द लिटरेचर लॉरेट” अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान डॉ० निशंक को उनकी रचनाधर्मिता, हिन्दी एवं संस्कृत भाषा के सम्वर्धन तथा प्रचार-प्रसार के साथ ही लेखक गांव की संकल्पना को साकार करने के लिए प्रदान किया है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश नीरव एवं सचिव क्रिस्टीन म्यूलर ने डॉ० निशंक को यह सम्मान प्रदान किया। पंडित नीरव ने कहा कि डॉ० निशंक एकमात्र राजनैतिज्ञ है, जिन्होंने हिन्दी एवं संस्कृत भाषा एवं संस्कृति के उत्थान के लिए निर्बाध गति से कार्य किया है और आज भी कार्य कर रहे हैं, आपका साहित्य आज भारत ही नहीं अपितु विश्व के अनेक देशों में भी अनेकों भाषाओं में अनुवादित हुआ है, भारत की संस्कृति का प्रचार-प्रसार निशंक जी की पुस्तकों से बड़ी सरलता से हो रहा है। विश्वभर में हिन्दी, संस्कृत एंव भारतीय भाषाओं को विस्तार देने के लिए अनेकों संगठन एवं संस्थायें निरंतर कार्य कर रही है, और डॉ० निशंक का एक साहित्यकार एवं राजनेता दोनों ही रूपों में सभी को सहयोग मिलता है, हमें डॉ० निशंक को यह सम्मान देने में हमें गर्व हो रहा है।

ज्ञात हो कि डॉ. निशंक की प्रेरणा से देहरादून में शिवालिक पहाड़ियों के आँचल में ‘लेखक गांव’ की स्थापना की गई है। जिसका उद्घाटन 25 अक्टूबर 2024 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उत्तराखंड के राज्यपाल ले.ज. गुरुमीत सिंह (से.नि.), उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं प्रसिद्ध गीतकार एवं फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी द्वारा किया गया।

सम्मान मिलने पर डॉ० निशंक ने आभार प्रकट करते हुये कहा कि साहित्य सृजन समाज के निर्माण में एक अहम भूमिका निभाता है. भाषा-संस्कृति, आध्यात्म एवं आस्था का समावेश मानव के विकास में आवश्यक है, और पुस्तकें इसका सरल माध्यम है। डॉ० निशंक ने कहा कि “लेखक गांव” रचनाधर्मिता का एक वैश्विक केन्द्र बनने की कल्पना के साथ स्थापित हुआ है, निकट भविष्य में लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लेखकों, नवोदित साहित्यकारों, कवियों, शोधार्थियों एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों का अध्ययन केन्द्र बनेगा। उन्होंने कहा कि लेखक गांव में प्रथम चरण चालीस हजार पुस्तकों के साथ स्थापित ‘नालंदा पुस्तकालय’ में में 10 लाख पुस्तकें संकलन करने का लक्ष्य है।

संस्था के सचिव क्रिस्टीन म्यूलर ने कहा कि डॉ० निशंक की 110 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन एक बड़ी उपलब्धि है, डॉ० निशंक के साहित्य पर लगभग 25 शोध हो चुके है और भारत सहित विश्व के अनेक देशों में उनकी पुस्तकें पढ़ाई जा रही है। भारत ही नहीं अपितु विश्व की अनेक भाषाओं में आपकी पुस्तकों का अनुवाद हुआ है।

इस अवसर पर डॉ. शिप्रा शिल्पी, अध्यक्ष अन्तरराष्ट्रीय सृजनी द ग्लोबल, अनिल जोशी, अध्यक्ष वैश्विक हिन्दी परिवार, कपिल त्रिपाठी, वैज्ञानिक, साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, साहित्यकार मधु मिश्रा, डॉ. वेदप्रकाश, डॉ. कविता सिंह प्रभा तथा ऋषि सक्सेना सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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