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मेयर चुनाव को लेकर राजधानी का सियासी तापमान तेज, 50 से अधिक पार्षद मेयर बनने की दौड़ में उतरे 

मेयर चुनाव को लेकर राजधानी का सियासी तापमान तेज, 50 से अधिक पार्षद मेयर बनने की दौड़ में उतरे 

25 अप्रैल को होगा मेयर चुनाव 

वर्तमान मेयर महेश कुमार को फिर से उम्मीदवार बनाने पर आप का मंथन जारी 

भाजपा में हो रही एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ 

दिल्ली- एनसीआर। एमसीडी में मेयर चुनाव को लेकर राजधानी का सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है। भाजपा में तो एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। पार्टी के भीतर से 50 से अधिक पार्षद मेयर बनने की दौड़ में उतर चुके हैं। हर कोई इस मौके को अपने राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा अवसर मान रहा है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी (आप) भी रणनीति के तहत फिर से दलित चेहरा सामने लाने की तैयारी में है और इसके तहत वर्तमान मेयर महेश कुमार को फिर से उम्मीदवार बनाए जाने पर मंथन चल रहा है।

विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली हार और उसके बाद पार्टी के 20 से अधिक पार्षदों के इधर-उधर होने से एमसीडी में समीकरण बदल गए हैं। अब भाजपा पार्षदों की संख्या में आप से आगे निकल गई है। एमसीडी के सदन में पार्षदों, मनोनीत विधायकों और दिल्ली से लोकसभा व राज्यसभा सांसदों समेत 274 सदस्य होते हैं, लेकिन 12 वार्ड रिक्त होने के कारण अब एमसीडी सदन में 262 सदस्य हैं और मेयर चुनाव में जीत के लिए बहुमत का आंकड़ा 133 का है और अब तक के घटनाक्रम को देखें तो भाजपा के पास 135 सदस्य हैं। वहीं आम आदमी पार्टी के पास 119 सदस्य और कांग्रेस के आठ पार्षद है। इस कारण भाजपा की जीत तय सी मानी जा रही है।

उधर, पिछले कुछ महीनों में आम आदमी पार्टी को लगातार झटके लगे हैं। कई पार्षद पार्टी छोड़कर भाजपा का समर्थन कर चुके हैं या निष्क्रिय हो गए हैं। वहीं विधानसभा चुनावों में हार के कारण आम आदमी पार्टी कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी है। वह एमसीडी में 13 के बजाए तीन विधायक ही मनोनीत हैं। इसी का फायदा उठाते हुए भाजपा अब एमसीडी में मेयर पद पाने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई है। पार्टी के भीतर ही इतने अधिक दावेदार सामने आ चुके हैं कि शीर्ष नेतृत्व को नाम तय करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में पुराने पार्षदों के साथ-साथ नए पार्षद भी दावा पेश कर रहे हैं। लिहाजा कोई पार्षद अपने सामाजिक प्रभाव को गिनवा रहा है, कोई अपने क्षेत्र में विकास कार्यों का हवाला दे रहा है तो कोई आरएसएस और पार्टी के पुराने जुड़ाव को अपनी योग्यता के रूप में पेश कर रहा है।

वहीं, आम आदमी पार्टी भले ही पार्षदों की संख्या में कमजोर दिख रही हो, लेकिन वह अपनी सियासी पकड़ बनाए रखने के लिए फिर से सामाजिक समीकरणों का सहारा लेने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी एक बार फिर महेश कुमार को मेयर पद का उम्मीदवार बना सकती है। महेश कुमार दलित समुदाय से आते हैं और पार्टी को उम्मीद है कि इससे सामाजिक संदेश देने के साथ-साथ सहानुभूति लहर भी तैयार की जा सकेगी। कुल मिलाकर, एमसीडी का यह मेयर चुनाव न सिर्फ उसकी राजनीति को दिशा देगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि क्या भाजपा अपने बढ़ते प्रभाव को सत्ता में तब्दील कर पाएगी या आम आदमी पार्टी कोई बड़ा दांव चलने में सफल होगी। दोनों ही दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है और इसके नतीजे आने वाले महीनों की दिल्ली की सियासत पर गहरा असर डाल सकते हैं । मेयर चुनाव 25 अप्रैल को होगा और 21 अप्रैल तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकते है। माना जा रहा है कि दोनों दल 21 अप्रैल को ही दोनों पार्टी मेयर पद के अपने उम्मीदवार के नाम के मामले में पत्ते खोलेंगे।

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