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वायनाड में 8वें दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी,  400 से ज्यादा लोगों की मौत

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वायनाड। सोमवार देर रात पुथुमाला में भूस्खलन के बाद मारे गए 29 अज्ञात लोगों और 154 बॉडी पार्ट्स का सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया गया। उनकी आत्मा की शांति के लिए आज मंगलवार को सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। भूस्खलन के आठवें दिन (मंगलवार) भी सर्च ऑपरेशन जारी है। आज सोचीपारा के सनराइज वैली दुर्गम क्षेत्र में हेलीकॉप्टर की मदद से एक टीम पहुंचेगी। इस इलाके में 20 से ज्यादा घर थे। चालियार नदी में भी लापता लोगों को खोजा जा रहा है।

प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर केरल का वायनाड अपनी भूगोलिक संरचना की वजह से प्राकृतिक आपदा का शिकार बना है। साल 2019 में केरल सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री तट और पश्चिमी घाट की ढलानों के करीब होने की वजह से केरल राज्य प्राकृतिक आपदाओं के मामले में काफी संवेदनशील है। यहां का इको-सिस्टम नाजुक होने के कारण, प्रशासन ने इस एरिया को इको-सेंसिटिव एरिया (ESA) का टैग भी दिया हुआ है।

भूस्खलन के बाद से वायनाड में लगातार छुट्टियों के बाद सोमवार से स्कूल खुल गए। हालांकि जिन स्कूलों में राहत शिविर चल रहे हैं, वहां छुट्टी जारी रहेगी। मलप्पुरम जिले में भी राहत कार्यों के कारण स्कूलों में छुट्टियां घोषित की गई हैं। वायनाड में कुल 53 राहत शिविरों में 6759 लोग रह रहे हैं। इनमें 1983 परिवार, 2501 पुरुष, 2677 महिलाएं, 20 गर्भवती महिलाएं और 1581 बच्चे शामिल हैं।

वायनाड में भारी बारिश इस भूस्खलन का सबसे बड़ा कारण है। लगातार बारिश से मिट्टी नरम हो गई, जिसके कारण पहाड़ों से मिट्टी और पत्थर खिसककर नीचे आ गए। वायनाड में आए भूस्खलन के बाद वन विभाग के अधिकारी भी दूरदराज के इलाकों से लोगों का रेस्क्यू कर रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन के 5वें दिन बाद दूर दराज के आदिवासी इलाके से 4 बच्चों समेत 6 लोगों का रेस्क्यू किया था। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और उनकी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

यह त्रासदी वायनाड के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जो इसके इको-सिस्टम को और अधिक स्थिर बनाने के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता की ओर इशारा करती है।

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