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शिक्षा विभाग में एनईपी-2020 क्रियान्वयन के 71 लक्ष्य पूर्ण- धन सिंह रावत

शिक्षा विभाग में एनईपी-2020 क्रियान्वयन के 71 लक्ष्य पूर्ण- धन सिंह रावत

प्री-प्राइमरी एजुकेशन पर विशेष फोकस, पाठ्यक्रम तैयार

एससीईआरटी व डायट्स में 14 माॅडल बालवाटिकाएं स्थापित

 

देहरादून:  भारत सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को सार्थक ट्रैकर पर विद्यालयी शिक्षा विभाग को दिये गये 202 लक्ष्यों में से 71 लक्ष्य पूर्ण कर दिये गये हैं, जबकि 111 लक्ष्यों पर युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है। राज्य में एनईपी-2020 लागू होने के उपरांत प्री-प्राइमरी एजुकेशन पर विशेष फोकस किया गया। जिसके तहत एससीईआरटी सहित सभी 13 डायट्स में माॅडल बालवाटिकाएं स्थापित की गई जबकि प्रदेश के समस्त 5982 को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केन्द्रों में बालवाटिकाओं का संचालन किया जा रहा है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की निदेशक वंदन गब्र्याल ने बताया कि प्रदेश में एनईपी-2020 के प्रावधानों को समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से लागू करने के लिये निरंतर कार्य किया जा रहा हे। उन्होंने बताया कि राज्य में एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा ‘सार्थक ट्रैकर’ के माध्यम से विभिन्न श्रेणी में 202 लक्ष्य दिये थे। जिनमें से अभी तक राज्य में बालवाटिकाएं, पाठ्यचार्य की रूपरेखा, कौशल आधारित प्रशिक्षण, शिक्षकों का सतत व्यावासायिक विकास सहित विभिन्न श्रेणियों में 71 लक्ष्य पूर्ण कर दिये गये है, जबकि 111 लक्ष्यों पर कार्य गतिमान है।

शेष 20 लक्ष्यों पर भारत सरकार से गाइडलाइन जारी होने के बाद कार्य प्रारम्भ किया जाना है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के तहत राज्य में सभी 5982 को-लोकेटेड आंगनवाडी केन्द्रों में बालवाटिकाओं का संचालन किया जा रहा है। जबकि एससीईआरटी तथा सभी 13 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट्स) में कुल 14 मॉडल बालवाटिकाएं स्थापित की गई हैं।

उन्होंने बताया कि बालवाटिका कक्षाओं के प्रभावी संचालन के लिए 11,196 आंगनवाड़ी कार्यकत्र्रियों, शिक्षकों एवं विभागीय अधिकारियों को दो चरणों में वर्चुअल स्टूडियो के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। बच्चों की प्रारम्भिक शिक्षा को आनंददायक एवं गतिविधि-आधारित बनाने के उद्देश्य से सभी प्राथमिक विद्यालयों में ‘जादुई पिटारा’ उपलब्ध कराया गया है, जिसमें 27 प्रकार के खिलौने एवं 13 प्रकार की शिक्षण-सामग्री शामिल है। इसके अतिरिक्त सभी विद्यालयों में स्कूल रेडीनेस मॉड्यूल ‘आरोही’ लागू किया गया है।

निदेशक ने बताया कि निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान से संबंधित पुस्तिकाएं विकसित कर विद्यालयों में पढ़ाई जा रही हैं, जिनकी ‘प्रगति ऐप’ के माध्यम से नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्र नामांकन बढ़ाने एवं ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 3,198 ड्रॉपआउट बच्चों को चिन्हित कर ब्रिज कोर्स के माध्यम से पुनः शिक्षा से जोड़ा गया है। वहीं 5,086 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में से 354 बच्चों को गृह-आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई गई है।

वंदना गब्र्याल ने बताया कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की अनुशंसाओं के अनुरूप राज्य पाठ्यचर्या तैयार कर ली गई है। साथ ही कौशल आधारित शिक्षक प्रशिक्षण, समावेशी एवं समतामूलक शिक्षा, विद्यालयों में भौतिक एवं मानवीय संसाधनों का विकास, माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा का विस्तार, बहुभाषिकता को प्रोत्साहन, ऑनलाइन एवं डिजिटल शिक्षा तथा उल्लास कार्यक्रम से जुड़े निर्धारित लक्ष्यों को भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और सभी संबद्ध संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से शेष लक्ष्यों को भी निर्धारित समयावधि में पूर्ण कर उत्तराखंड को नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया जाएगा।

 

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