Flash Story
ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान को देहरादून जिला प्रशासन की अनूठी पहल ‘रात्रि चौपाल’ शुरू
ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान को देहरादून जिला प्रशासन की अनूठी पहल ‘रात्रि चौपाल’ शुरू
एमडीडीए का बड़ा एक्शन- पांच जगह सीलिंग, आवासीय कॉलोनियों में अवैध कारोबार पर चला डंडा
एमडीडीए का बड़ा एक्शन- पांच जगह सीलिंग, आवासीय कॉलोनियों में अवैध कारोबार पर चला डंडा
देहरादून के नकरौंदा स्थित होटल/होमस्टे में आबकारी विभाग की छापेमारी, शराब की बड़ी खेप बरामद
देहरादून के नकरौंदा स्थित होटल/होमस्टे में आबकारी विभाग की छापेमारी, शराब की बड़ी खेप बरामद
पौड़ी में विकसित किया जा रहा इको एडवेंचर पार्क, साहसिक पर्यटन और रोमांच का बनेगा नया केंद्र
पौड़ी में विकसित किया जा रहा इको एडवेंचर पार्क, साहसिक पर्यटन और रोमांच का बनेगा नया केंद्र
एशियाई पैरा गेम्स में आयुष वर्मा का कमाल, शॉटपुट में जीता गोल्ड मेडल
एशियाई पैरा गेम्स में आयुष वर्मा का कमाल, शॉटपुट में जीता गोल्ड मेडल
गला सूखने की समस्या को न करें नजरअंदाज, पानी पीने के बाद भी मुंह सूखने के हो सकते हैं ये 6 कारण
गला सूखने की समस्या को न करें नजरअंदाज, पानी पीने के बाद भी मुंह सूखने के हो सकते हैं ये 6 कारण
23 अक्टूबर से शुरू होगी ईवीएम, वीवीपैट एवं कंट्रोल यूनिट की प्रथम स्तरीय जांच
23 अक्टूबर से शुरू होगी ईवीएम, वीवीपैट एवं कंट्रोल यूनिट की प्रथम स्तरीय जांच
विशेष दिव्यांग शिविर में 42 दिव्यांगजनों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए गए, 07 नए बैंक खाते खोले गए
विशेष दिव्यांग शिविर में 42 दिव्यांगजनों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए गए, 07 नए बैंक खाते खोले गए
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने गोर्खाली समाज के वरिष्ठजनों से लिया आशीर्वाद, दशैं एवं विजयादशमी की दी शुभकामनाएं
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने गोर्खाली समाज के वरिष्ठजनों से लिया आशीर्वाद, दशैं एवं विजयादशमी की दी शुभकामनाएं

महंगे एक्सप्रेस-वेज ही इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं

महंगे एक्सप्रेस-वेज ही इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं

सिर्फ ऊंचे टॉल टैक्स वाले महंगे एक्सप्रेस-वेज (जो आम जन की पहुंच से बाहर हों) ही इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं हैं। असल कसौटी यह है कि एक्सप्रेज-वेज से उतरने के बाद शहर और गांवों में ऐसे निर्माणों के कारण जिंदगी कितनी सहूलियत भरी हुई है।

लखनऊ में चारबाग स्टेशन के बाहर नौका चलते देखना कौतुक से भरा अनुभव है। वाराणसी में शहर के अंदर जगह-जगह तालाब जैसा नज़ारा बनना उससे कोई कम तजुर्बा नहीं है। ठीक ही कटाक्ष किया गया है कि वादा वाराणसी को क्योटो (जापान की स्मार्ट सिटी) बनाने का था, लेकिन उसे वेनिस (इटली का मशहूर नगर जहां शहर के अंदर मौजूद झीलों में नौकाएं चलती हैं) बना दिया गया। यह तो सिर्फ दो मिसालें हैं।

जल जमाव के शिकार शहरों की सूची रोज लंबी होती जा रही है। सोमवार सुबह-सुबह खबर आई की महानगर मुंबई में रात में हुई बारिश से जगह-जगह पानी भर गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वैसा नज़ारा पैदा हुए अभी कुछ रोज ही गुजरे हैं। यानी महानगर से लेकर छोटे शहरों तक में इस मामले में समरूपता बनती जा रही है। एयरपोर्ट्स के अंदर पानी घुसना और ट्रेनों से लेकर रेलवे स्टेशनों तक पर ऊपर से रिसते पानी से झरने जैसा दृश्य बनना आम हो गया है। यह उस देश का हाल है, जहां “तेजी से विकसित होते इन्फ्रास्ट्रक्चर” की कहानियां इस तरह फैली हैं कि देशवासी अक्सर उस पर गर्व करते दिखते हैं।

ये कहानियां दूर-दूर तक फैली हैं। कुछ समय पहले मशहूर ब्रिटिश पत्रिका द इकॉनमिस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में इसे “माउथवाटरिंग” इन्फ्राक्टक्चर निर्माण कहा था। बहरहाल, आम भारतवासियों के मुंह में इस निर्माण को देख कर पानी भले ना आता हो, लेकिन उन्हें अपने चारों ओर भरे पानी को चीरते हुए जरूर गुजरना पड़ रहा है। तो अब जरूरी हो गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के बारे में नई समझ बनाई जाए। सिर्फ ऊंचे टॉल टैक्स वाले एक्सप्रेस-वेज (जो आम जन की पहुंच से बाहर हों) ही इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं हैं। असल कसौटी यह है कि एक्सप्रेज-वेज से उतरने के बाद शहर और गांवों में ऐसे निर्माणों के कारण जिंदगी कितनी सहूलियत भरी हुई है। वैसे तो हर मौसम में इस कसौटी पर हमारी बस्तियां फेल होती हैं, लेकिन इस वर्ष की बरसात में टूटते पुलों, सडक़ों में पड़ती दरार, एयरपोर्ट और रेलवे ढांचे में घुसते पानी, आदि ने कुछ ज्यादा पोल खोल दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top