Flash Story
नशा तस्करी के खिलाफ दून पुलिस की कार्रवाई, एनडीपीएस एक्ट में वांछित आरोपी गिरफ्तार
नशा तस्करी के खिलाफ दून पुलिस की कार्रवाई, एनडीपीएस एक्ट में वांछित आरोपी गिरफ्तार
दिव्यांगजनों की प्रतिभा और उपलब्धियों को मिलेगा सम्मान
दिव्यांगजनों की प्रतिभा और उपलब्धियों को मिलेगा सम्मान
शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है- मुख्यमंत्री
शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है- मुख्यमंत्री
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री से की शिष्टाचार भेंट
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री से की शिष्टाचार भेंट
बीरोंखाल में श्रमिक पंजीकरण शिविर, सैकड़ों श्रमिकों ने लिया हिस्सा
बीरोंखाल में श्रमिक पंजीकरण शिविर, सैकड़ों श्रमिकों ने लिया हिस्सा
जल एवं मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
जल एवं मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास गहरी खाई में मिला व्यक्ति का शव
देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास गहरी खाई में मिला व्यक्ति का शव
‘मिर्जापुर द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका, 4 दिनों में पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
‘मिर्जापुर द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका, 4 दिनों में पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
मुख्यमंत्री धामी से मिले नन्हे पर्वतारोही रियांश पंत और प्रिशा रावत
मुख्यमंत्री धामी से मिले नन्हे पर्वतारोही रियांश पंत और प्रिशा रावत

मरते दम तक नसीब न हुई सड़क, 12 किमी पगडंडी से गांव लौटा शव

मरते दम तक नसीब न हुई सड़क, 12 किमी पगडंडी से गांव लौटा शव

मुख्यमंत्री की ही विधानसभा में विकास के दावों की खुली पोल, राज्य गठन के 25 साल बाद भी सड़क का इंतजार

चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले से आई एक हकीकत ने राज्य के विकास मॉडल पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह कोई दूर-दराज़ का इलाका नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ही विधानसभा क्षेत्र की कहानी है — जहां एक 65 वर्षीय बुज़ुर्ग का शव सड़क न होने की वजह से 12 किलोमीटर लंबी पगडंडी से गांव तक लाया गया।

भारी बारिश, पगडंडी और लाचारी

तल्लादेश के खटगिरी गांव के निवासी संतोष सिंह की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए चंपावत जिला अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनके शव को वाहन से मंच तक तो लाया गया, लेकिन वहां से आगे सड़क का नामोनिशान नहीं था।

भारी बारिश और उबड़-खाबड़ पगडंडी के बीच ग्रामीणों ने शव को लकड़ी के डंडे पर रखकर पन्नी से लपेटा, और 12 किलोमीटर पैदल यात्रा कर शव को गांव तक पहुंचाया।

जीते जी सड़क नहीं, मरने के बाद भी संघर्ष

संतोष सिंह की कहानी, केवल एक मौत की नहीं है — यह उन हज़ारों पहाड़ी ग्रामीणों की आवाज़ है जो राज्य गठन के 25 साल बाद भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। “जिंदा रहते सड़क नसीब नहीं हुई, मरने के बाद भी पगडंडी ही सहारा बनी” — इस वाक्य ने पूरे इलाके को भीतर तक झकझोर दिया है।

मुख्यमंत्री की ‘आदर्श विधानसभा’ में ऐसी तस्वीर!

यह घटना इसलिए और अधिक विडंबनापूर्ण है क्योंकि यह उसी विधानसभा क्षेत्र की है, जिसका प्रतिनिधित्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद करते हैं। बार-बार “आदर्श विधानसभा” बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन यह एक घटना उन दावों की सच्चाई की पोल खोलने के लिए काफी है।

25 साल और अब भी इंतजार

ग्रामीणों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य बने ढाई दशक हो चुके हैं, लेकिन आज भी उनके गांव में सड़क नहीं है। उनका यह भी कहना है कि कई बार प्रशासन को आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top